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हिन्द-युग्म Hindi Kavita: हम मरे
भगवान् बुद्ध से अभिभूत हो कर लिखी गयी गुरु रबिन्द्रनाथ ठाकुर की कविता का हिंदी भावानुवाद
बुद्ध / मेरे ईश्वर/ मेरे स्वामी
आपका जन्म स्थान /
मनुष्य की वह निर्मम दुनिया है /
जहां आपकी करुणा /
भरती है /
विराट विफलता की रिक्तता /
करती है मदद उनकी /
जो खो चुके हैं अपनी आस्था /
ठगे गए हैं अपने विश्वास में /
डुबा कर तुझमें /
भूल सकें / अपना विगलित स्व /
और कर दें विस्मृत ,
दिन की भयावह यादों को /
---प्रो. (डॉ.) ए. के . पुरोहित द्वारा हिंदी भावानुवाद
“Buddha my Lord, My master
thy birth place, truly here
where cruel is the world of men,
for thy mercy is to fill the blank
of their utter failure, to help them
who have lost their faith and
betrayed their trust, to forget their malignant day”